हाई कोर्ट की हड्की के बाद आखिरकार स्टार न्यूज़ ने स्पीक एशिया के खिलाफ चलाये गए अपने झूठे दुष्प्रचार के लिए खेद व्यक्त किया है, लेकिन मुझे ये समझ नहीं आता है की हम इस खेद का क्या करें. उनके खेद को हम अगर रख भी लें तो हम उसका हमें क्या फायदा , खेद को काट कर अचार भी नहीं डाला जा सकता है, कुल मिलाकर खेद बिलकुल बेकार की चीज़ है, और अगर स्टार न्यूज़ ने खेद व्यक्त कर भी दिया तो वो कौन सी घटने वाली चीज़ है, जो कम हो जायगी.
अगर हिटलर आ कर खेद व्यक्त करे की "उसने गैस चैम्बर्स में जितने भी यहूदियों की हत्या की है, वो उन सभी के लिए माफ मांगता है". अब आप को क्या लगता है की उन लाखों औरतों, बच्चों , पुरुषों ने जिन्होंने उन गैस चम्बेर्स के अंदर पीड़ा से भरी हुई अंतिम साँसे ली ,और जिन लोगो ने अपने बच्चो को अपनी आँखों के सामने तड़प कर मरते हुए देखा, हिटलर द्वारा केवल खेद व्यक्त कर देने से वो माफ़ी के योग्य हो गया ?
स्टार न्यूज़ ने २० लाख लोगो के सपनो से खेला है, मै ऐसे कई लोगो को जानता हू जो पिछले १ वर्ष से स्पीक एशिया की रोटी ही खा रहे थे ,ऐसे बेरोजगार युवको को जानता हू जिनकी आँखों में स्पीक एशिया ने सुनहरे भविष्य की एक चमक ला दी थी, स्टार न्यूज़ ने ऐसे लोगो में मूह से रोटी छीनी है, व्यापार की एक बिलकुल नयी अवधारणा को पगु बना दिया. माफ़ी मांग लेने से स्टार न्यूज़ के पाप कम नहीं हो जाते, बल्कि और बढ़ जाते हैं, क्यों की उसने केवल एक न्यूज़ के लिए माफ़ी मांगी है, उन हजारों न्यूज़ के लिए नहीं जो वो पिछले लगभग १० वर्षों से अपने व्यवसायिक लाभ के लिए प्रकाशित कर रहा है, और जिन न्यूज़ ने लाखो लोगो के जीवन में जहर घोला होगा, लेकिन वे बेचारे स्पीक एशिया की तरह मजबूती के साथ खड़े नहीं रह सके होंगे और हजारों ने तो चुपचाप शोषण का शिकार होना स्वीकार कर लिया होगा.कार्ट द्वारा स्टार न्यूज़ को कम से कम १ वर्ष के लिए प्रतिबंधित किया जाना चाहिए, ये सही मायनों में एक कठोर और सही निर्णय होगा, ये अन्य न्यूज़ चैनल्स के लिए भी एक सबक होगा की ताकत का उपयोग जनहित में होना चाहिए, संहार में नहीं. स्टार न्यूज़ ने २० लाख लोगो के जीवन को प्रभावित किया है और इसे छोटी बात तो बिलकुल भी नहीं समझा जाना चाहिए


